Saturday, November 26, 2011

पुलिस व निगम को क्यों नहीं दिखा अवैध निर्माण


नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : चारों तरफ पर्दा लगाकर प्लाट में अवैध निर्माण हो रहा है और पुलिस व निगम कहें कि उन्हें दिखाई नहीं दिया तो यह चिंता का विषय है। यह टिप्पणी करते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट के सिविल जज राजकुमार ने वेलकम थाना प्रभारी और नगर निगम शाहदरा उत्तरी जोन के उपायुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। दोनों संस्थाओं से दो दिसंबर तक अदालत में पेश होकर जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
अधिवक्ता तेज सिंह चौहान ने बताया कि मोहम्मद शमीम ने छज्जूपुर में चाणक्य मार्ग पर प्लाट का टुकड़ा खरीदने से पहले नगर निगम अधिकारियों से पूछताछ की कि वह जिस प्लाट को खरीदना चाहता है, क्या उसका नक्शा पास हो जाएगा? निगम अधिकारियों ने कहा कि प्लाट टुकड़ों में होने के कारण उसका नक्शा पास नहीं होगा। कुछ दिन बाद मोहम्मद शमीम ने देखा कि जिस प्लाट को वह खरीदना चाहता है, उसके बराबर वाले प्लाट में चारों तरफ पर्दा लगाकर एक व्यक्ति द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा था। उसने उक्त निर्माण कार्य के संबंध में निगम अधिकारियों को शिकायत की तो निगम अधिकारियों ने निर्माण कार्य को लेकर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें वहां पर कोई भी अवैध निर्माण दिखाई नहीं दे रहा। मोहम्मद शमीम ने उक्त जगह की फोटो कराई और मामले की शिकायत वेलकम थाना पुलिस से की, मगर पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। शमीम ने उक्त मामले में अदालत में याचिका दायर की। उसने अदालत के समक्ष अवैध निर्माण के फोटोग्राफ भी पेश किए।

बंटवारे पर विधानसभा का विशेष सत्र 30 से

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली मंत्रिमंडल ने 30 नवंबर से दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है। दो दिन के इस सत्र में दिल्ली नगर निगम के विभाजन के फैसले पर मुहर लगाए जाने की उम्मीद है। विधानसभा से हरी झंडी मिलने के बाद बंटवारे की फाइल एक बार फिर दिल्ली के उपराज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति के पास जाएगी और उनके हस्ताक्षर के बाद निगम के विभाजन की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 
     गृह मंत्रालय से बंटवारे की फाइल बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली सचिवालय पहुंची। इसके बाद अपराह्न चार बजे मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता में दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इसमें विधानसभा का दो दिन का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया गया। 
     नगर निगम के बंटवारे को अंजाम तक पहुंचाने में मिली सफलता से गदगद दिख रही मुख्यमंत्री ने बताया कि अब दिल्ली में पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी तीन नगर निगम होंगे। महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। अनुसूचित जातियों के लिए भी सीटें आरक्षित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि नगर निगम की सीटों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। कुल सीटें 272 ही रहेंगी। इनमें से उत्तरी तथा दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 104-104 सीटें होंगी जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम का स्वरूप इन

वक्त का तकाजा था निगम का बंटवारा

   नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में विभाजित किए जाने के फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। लेकिन उन्होंने दिल्ली वालों को यह ताकीद भी की है कि उनके हाथ में कोई जादू की छड़ी नहीं है कि नगर निगम की व्यवस्था को रातों रात बदल डालें। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि उनकी सरकार ने नई व्यवस्था को अमल में लाने की तैयारी शुरू कर दी है। स्थानीय निकाय निदेशालय की रूपरेखा बनाई जा रही है। किस प्रकार तीनों निगमों के बीच सामंजस्य हो, इसका ढांचा बनाया जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने में करीब एक साल का वक्त लगेगा। 
     मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला न केवल दिल्ली के लिए, बल्कि पूरे देश में स्थानीय निकायों के संचालन के लिए एक नजीर है। उन्होंने कहा कि हर शहर की आबादी में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसलिए वक्त का तकाजा है कि स्थानीय निकायों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर सरकारी सुविधाएं आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाई जाएं। सूरत, नागपुर आदि शहरों के नाम गिनाते हुए उन्होंने कहा कि वहां पर स्थानीय निकाय बेहतर काम कर रहे हैं क्योंकि उनका जरूरत के अनुरूप विभाजन किया गया है। 
     शीला दीक्षित ने बानगी के तौर पर बाहरी दिल्ली में सड़कों की स्थिति की चर्चा करते हुए कहा कि अब वहां का नगर निगम

Thursday, November 24, 2011

दिल्ली नगर निगम के विभाजन को मंजूरी


Nov 23, 09:55 pm

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो: केंद्र सरकार ने दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बृहस्पतिवार शाम चार बजे दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। बैठक में दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र की तारीख तय की जाएगी ताकि नगर निगम के विभाजन के फैसले को अमली जामा पहनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात के बाद नगर निगम के विभाजन के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गृहमंत्री ने बंटवारे से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने नगर निगम विभाजन के मामले में एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बुधवार को अपने पूरे मंत्रिमंडल को साथ लेकर गृहमंत्री चिदंबरम से मिलने का फैसला किया और शाम करीब पांच बजे नार्थ ब्लॉक जा पहुंची। दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने बताया कि गृहमंत्री ने इस बैठक में जानकारी दी कि उन्होंने फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और यह बुधवार देर शाम अथवा बृहस्पतिवार सुबह तक दिल्ली सरकार के पास पहुंच जाएगी। इस सूचना से उत्साहित मुख्यमंत्री व तमाम मंत्रियों ने गृहमंत्री का आभार जताया और निकल आए।
बता दें कि बीते 8 नवंबर को ही मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गृहमंत्री से अपने अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी और 11 नवंबर को बंटवारे के प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय की मोहर लगने का ऐलान भी कर दिया। लेकिन उस दिन कुछ भी नहीं हुआ। पिछले 12 दिनों तक लगातार प्रयास करने के बाद बुधवार को उन्होंने दबाव की राजनीति और इस फैसले को लेकर आपसी एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ गृहमंत्री से मिलने का फैसला किया। उनकी यह कोशिश रंग भी लाई।
दिल्ली सरकार के जानकार सूत्रों की मानें, तो मंगलवार को ही संबंधित फाइल के दिल्ली सचिवालय पहुंचने की संभावना थी। सरकार के कुछ आला अधिकारी देर शाम तक अपने दफ्तरों में बैठकर इसका इंतजार भी करते रहे। बाद में निराश होकर चले गए। समझा जा रहा है कि लगातार हो रही देरी के मद्देनजर ही मुख्यमंत्री ने पूरे मंत्रिमंडल को साथ लेकर गृहमंत्री से मिलने का दांव चला जो कारगर रहा।

निदेशालय की निगरानी में रहेंगे तीन निगम


Nov 23, 09:55 pm

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो: केंद्र की मंजूरी के बाद दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके साथ ही तीनों नगर निगमों में अब 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने संबंधी प्रस्ताव पर भी मोहर लग गई है। दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल के प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक नगर निगम को पूर्वी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली तथा दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के तौर पर तीन हिस्सों में विभाजित कर दिया जाएगा। वार्डो की संख्या 272 ही रहेगी और इसमें से 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
तीनों निगमों के लिए अलग-अलग तीन महापौर व तीन उपमहापौर होंगे। इसके अलावा तीनों निगमों के लिए अलग-अलग तीन आयुक्तों की भी नियुक्ति की जाएगी। आयुक्तों के आर्थिक अधिकारों में वृद्धि की जाएगी। इसे 25 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया जाएगा। प्रस्तावित बिल के अनुसार मुख्यमंत्री की अगुवाई में एक समिति का गठन किया जाएगा जो तीनों महापौरों व उपमहापौरों के कामकाज पर नजर रखेगी। सड़क, फ्लाईओवर, प्राथमिक शिक्षा, पार्क भवन उपनियमों का नियमन, अधिकारियों की नियुक्ति और उनके तबादले आदि मामले सीधे दिल्ली सरकार के अधीन हो जाएंगे।
एक स्थानीय निकाय निदेशालय का गठन किया जाएगा। एक प्रमुख आयुक्त होगा जो तीनों निगमों के कामकाज की निगरानी करेगा। इस प्रमुख आयुक्त तथा तीनों आयुक्तों की नियुक्ति केंद्रीय गृह मंत्रालय दिल्ली सरकार के साथ मंत्रणा के बाद करेगा। बंटवारे के बाद उत्तरी दिल्ली दक्षिणी दिल्ली नगर निगमों के तहत 104-104 वार्ड तथा 26-26 विधानसभा क्षेत्र आएंगे होंगे जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम के तहत 64 वार्ड और 16 विधानसभा क्षेत्रों को रखा जाएगा।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के तहत 52 लाख की आबादी आएगी। बादली, रिठाला, बवाना, किराड़ी, मंगोलपुरी, त्रिनगर, मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटियामहल, करोलबाग, मोतीनगर आदि क्षेत्र इसके तहत आएंगे। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के तहत 49 लाख लोगों की आबादी आएगी। इसके तहत महिपालपुर, रजौरी गार्डन, जनकपुरी, हरि नगर, तिलक नगर, द्वारका, जंगपुरा, ग्रेटर कैलाश, आरके पुरम, मालवीय नगर, कालकाजी, अंबेडकर नगर, बदरपुर आदि इलाके आएंगे।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के तहत 32 लाख लोगों की आबादी आएगी। पटपड़गंज, कोंडली, लक्ष्मी नगर, सीमापुरी, घोंडा, करावल नगर, बाबरपुर, शाहदरा आदि क्षेत्र इसके तहत आएंगे। विधेयक के मुताबिक अनुसूचित जातियों के लिए 46 सीटें आरक्षित रहेंगी जबकि इस कोटे में भी महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलेगा। उत्तरी दिल्ली में 20, दक्षिणी दिल्ली में 15 तथा पूर्वी दिल्ली में 11 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित रहेंगी।

साउथ एक्स. में दस अवैध निर्माण सील


Nov 23, 11:38 pm

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की कार्रवाई बुधवार को भी जारी रही। इस बार कार्रवाई हुई साउथ एक्सटेंशन में। अपरान्ह दो बजे के बाद सेंट्रल जोन के भवन विभाग ने क्षेत्र की 10 इमारतों में बने अवैध निर्माण को सील कर बिजली-पानी का कनेक्शन भी काट दिया। इस दौरान एक ऐसे संपत्ति को सील किया गया, जिसमें अवैध रूप से 20 दुकानें चल रही थीं। हालांकि गत दिनों की तरह बुधंवार को भी पुलिस बल विलंब से मिला, जिसके चलते सीलिंग की कार्रवाई काफी देर से शुरू हो पाई।
इसके साथ ही मंगलवार को साउथ एक्सटेंशन पार्ट-वन में सील किए गए पेइंग गेस्ट हाउस को देर शाम चंद घंटे के लिए खोला गया। वहां रहने वाली लड़कियों ने अंदर से अपना सामान निकालने के लिए कमरों को खोलने का आग्रह किया था। इसके बाद बुधवार को दोबारा पेइंग गेस्ट हाउस को एमसीडी ने सील कर दिया। भवन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभी सप्ताह भर साउथ एक्सटेंशन इलाके में इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। इसके तहत पार्ट-वन में अवैध रूप से चल रहे आठ-10 पेइंग गेस्ट हाउस को और सील किया जाएगा। इसकी सूचना संपत्ति मालिक को दे दी गई है।
उधर, एमसीडी के निदेशक (सूचना एंव प्रचार) योगेंद्र सिंह मान बताते हैं, बुधंवार को नियमित कार्रवाई के तहत एमसीडी के तीन अलग-अलग जोन में कुल 46 संपत्तियों (मकान) में हुए अवैध निर्माण को ढहाया। दक्षिणी जोन में कुल सात संपत्तियों में हुए अवैध निर्माण पर एमसीडी के कार्रवाई कर ढहाया। यहां के हौज खास इलाके में संपत्ति संख्या 43, 73 व टी 71 में अवैध रूप से निर्मित हिस्से को जब ढहाने के लिए एमसीडी का दस्ता पहुंचा तो वहां स्थानीय लोगों ने विरोध किया। संपत्ति मालिकों का कहना था कि निर्माण को ढहाने की बजाए फिलहाल सील कर दिया जाए। मगर उनकी मांग नहीं मानी गई। इसके अलावा रोहिणी जोन में 9 तो सदर पहाड़गंज जोन में 30 संपत्तियों के अलग-अलग मंजिल पर हुए अवैध निर्माण के खिलाफ एमसीडी ने कार्रवाई की। सदर बाजार के पहाड़ी धीरज, मुलतानी ढांडा इलाके में कई मकानों में पांचवी मंजिल तक लोगों ने अवैध रूप से बना ली थी।

जिनके कागजात सही होंगे उन कॉलोनियों को नियमित करेंगे: शीला


Nov 25, 02:03 am

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। कागजी अनधिकृत कॉलोनियों के मामले में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बृहस्पतिवार को कहा कि जिन कॉलोनियों के कागजात सही होंगे उन्हें नियमित किया जाएगा। लेकिन जिन मामलों में गड़बड़ी है उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी और उनका नियमितीकरण भी नहीं हो पाएगा।
कागजी कॉलोनियों के मामले में लोकायुक्त जस्टिस मनमोहन सरीन द्वारा दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किए जाने के बारे में पूछने पर मुख्यमंत्री ने बताया कि गड़बड़ी करने वाली कॉलोनियों को सरकार ने भी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों को केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों के अनुरूप नियमितीकरण का प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किया।

पड़ताल : हिंडन पर तीसरे पुल का निर्माण


Nov 23, 06:01 pm

आशुतोष मिश्रा, गाजियाबाद
लोगों को सुगम यातायात व्यवस्था देने के लिए हिंडन पर तीसरे पुल का निर्माण शुरू किया गया। हालांकि, छह महीने में केवल बीस फीसदी काम हुआ है। जीडीए द्वारा इसे डेढ़ साल में पूरा करने का वायदा किया गया था। लेकिन, वर्तमान प्रगति के हिसाब से नहीं लगता है कि काम समय पर पूरा हो पाएगा। इस संबंध में जीडीए उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि पुल का काम समय से पूरा हो जाएगा। अभी एक साल का समय बाकी है।
जीटी रोड पर यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए काफी दिनों से हिंडन पर अतिरिक्त पुल बनाने की मांग चल रही थी। इसे लेकर जीडीए ने कई बार योजना बनायी, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण पुल बनाने का पूरा नहीं हो पाया।
स्वरूप और बनने की मियाद
काफी दिनों की कवायद के बाद जीडीए ने निर्धारित किया कि हिंडन पर दोनों पुलों के बीच तीसरे पुल का निर्माण किया जाएगा। पुल का डीपीआर बनने में ही 6 महीने लग गए। डीपीआर के मुताबिक पुल की कुल लंबाई 170 मीटर और चौड़ाई 11 मीटर है। पुल पर तीन लेन की सड़क होगी, जिससे वाहनों का आवागमन रहेगा। इसकी लागत करीब 29 करोड़ रुपये है। पुल का निर्माण 21 मई को शुरू किया गया और इसे पूरा होने की मियाद नवंबर 20 रखा गया।
निर्माण की गति धीमी
पुल निर्माण को शुरू हुए 6 महीने का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक केवल 20 फीसदी निर्माण पूरा हुआ है। अभी तक एक भी पिलर का काम पूरा नहीं हुआ है। सहायक अभियंता ए.के.चौधरी ने बताया कि दोनों और सड़क निर्माण के लिए 20 मीटर का भराव किया जा चुका है। पिलर बनाने का काम तेजी से चल रहा है। उनका दावा है कि समय पर काम पूरा हो जाएगा।
विलंब से यातायात व्यवस्था पर असर
पुल का निर्माण यातायात व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए किया जा रहा है लेकिन उल्टे पुल पर जाम की आम समस्या हो गयी है। एक साल बाद सड़कों पर यातायात दबाव बढ़ने की संभावना अधिक है। ऐसे में पुल पर यातायात का दबाव भी अधिक है। जब तक पुल बनेगा तब तक अतिरिक्त पुल की आवश्यकता महसूस की जाने लगेगी।

श्याम पार्क में बन रहे अवैध मकान व दुकान

Nov 23, 08:08 pm

गाजियाबाद, वरिष्ठ संवाददाता : श्याम पार्क में बड़े भूखंडों पर अवैध निर्माण का खेल काफी जोर शोर से चल रहा है। एक भूखंड पर मानकों के अनुरूप निर्माण न होने से कॉलोनी का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। बिल्डरों द्वारा फ्लैटों के साथ-साथ दुकानें भी बनायी जा रही हैं। रिहायशी इलाके में बिल्डरों द्वारा दुकानें बनाने के कारण अतिक्रमण और सड़कें टूटने की शिकायत मिल रही है। इससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बड़े भूखंडों पर नक्शे के विपरीत होता है निर्माण
श्याम पार्क में बड़े भूखंडों पर बिल्डरों की निगाह हर समय पड़ी रहती है। बिल्डर समय देखकर ऐसे भूखंडों को खरीदकर फ्लैट का निर्माण कर रहे हैं। ऐसे भूखंडों पर बहुमंजिला इमारतें बनायी जा रही है। बिल्डरों द्वारा ऐसे मामलों में जीडीए से नक्शा तो पास कराया जाता है, लेकिन नक्शे के विपरीत निर्माण किया जाता है। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर अवैध निर्माण चल रहा है। जीडीए अधिकारी इसे रोकने में अक्षम हैं।
फ्लैटों के साथ बनाए जाते हैं बेसमेंट और दुकानें
कॉलोनी में चल रहे अवैध निर्माण को रोकने के लिए जीडीए का प्रवर्तन दस्ता सक्रिय नहीं है। यहां पर नक्शे के विपरीत बेसमेंट का निर्माण किया जाता है। यही नहीं बेसमेंट के साथ दुकानें बनाकर बिल्डर उन्हें बेच देते हैं ऐसे में उनका मुनाफा दुगुना हो जाता है। यह स्थिति लगातार बनी हुई है। वर्तमान में कॉलोनी में सैकड़ों की संख्या में अवैध दुकानें बन गयी हैं।
रिहायशी इलाके में बनी दुकानों से होती है परेशानी
रिहायशी इलाके में दुकानें बनने के कारण यहां के लोगों को काफी परेशानी होती है। दुकानों के कारण सड़कों पर अतिक्रमण के अलावा भीड़ भाड़ हो जाती है इसकी वजह से लोगों को रहने में असुविधा होती है। कई इलाकों में मकानों के नीचे बाजार बन गए हैं।
इस संबंध में जीडीए सचिव नरेंद्र कुमार का कहना है कि इस मामले में अवैध निर्माण को रोकने के लिए अभियंताओं को विशेष हिदायत दी गयी है।

Friday, November 18, 2011


मल्टीलेबिल पार्किंग का निर्माण कार्य तेज

Nov 19, 12:55 am
गाजियाबाद, वरिष्ठ संवाददाता : पुराने शहर में पार्किंग की समस्या से निजात के लिए रमतेराम रोड पर मल्टीलेबिल पार्किंग व कॉमर्शियल कांप्लेक्स के निर्माण कार्य में तेजी आ गई है। यह तेजी प्रमुख सचिव नगर विकास दुर्गा शंकर मिश्रा के निर्देश के बाद आई है। दुर्गा शंकर मिश्रा ने पिछले दिनों प्रदेश के सभी नगर निगमों के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्माण कार्यो में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
क्या है योजना
रमतेराम रोड-जीटी रोड पर नगरनिगम ने पार्किंग की समस्या से निबटने के लिए मल्टीलेबिल पार्किंग तथा व्यावसायिक भवन बनाने का निर्णय लिया था। इसके लिए जो स्थान चिह्नित किया गया है, उस पर नगर निगम के स्टाफ क्वार्टर बने हुए थे। कड़ी मशक्कत से नगरनिगम ने इन भवनों को तुड़वाया और करीब चार माह पूर्व कार्य शुरू हुआ। यह इमारत चार मंजिला बनाई जा रही है। इसमें पहले दो मंजिलों पर 200 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होगी, जबकि ऊपरी दो मंजिलों पर दुकानें व शोरूम बनाए जाएंगे। प्रत्येक मंजिल पर 28-28 दुकानें तथा दो-दो शोरूम बनाए जाएंगे।
किस क्षेत्र को होगा लाभ
पुराने शहर के प्रमुख बाजार घंटाघर, अग्रसेन बाजार, चौपला, अनाज मंडी, गंदा नाला, तुराबनगर, रमतेराम रोड, नया गंज, पुरान गंज, डासना गेट, दिल्ली गेट, सब्जी मंडी, रेलवे रोड, बंजरिया आदि क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इससे लोग अपने वाहन बाजारों के बीचों-बीच तथा दुकानों के सामने खड़े कर देते हैं। जो जाम का कारण बनते हैं। मल्टीलेबिल पार्किंग में दो सौ कार एक साथ खड़ी करने की व्यवस्था है। नगर निगम अधिशासी अभियंता डीके त्यागी का कहना है कि स्थानीय बाजारों में अधिकतम 50 लोग अपनी गाड़ियों से आते हैं। इसके बाद भी 150 गाड़ियां खड़ी करने का स्थान यहां पर रहेगा। इस लिए उन्हें लगता है कि पार्किंग शुरू होने के बाद पुराने शहर में पार्किंग की समस्या न के बराबर रहेगी।
दुकानदारों को देना होगा मासिक शुल्क
दुकानदारों को इसपर अपना वाहन पार्किंग करने के लिए मंथली शुल्क वसूला जाएगा। जबकि जो लोग बाजारों में आएंगे उन्हें रोजाना ही शुल्क अदा करना होगा।
लोगों को मिलेगी राहत : नगर आयुक्त
नगर आयुक्त बसंत लाल का कहना है कि यह बिल्डिंग 5824 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाई जा रही है। इसमें 23.639 करोड़ रुपये की लागत आएगी। फिलहाल आधी बिल्डिंग को निर्माण कार्य लगभग अंतिम चरण में है। बहुत जल्द बाकी बचे हिस्से का निर्माण कार्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा। उनका कहना है कि अगले दो तीन माह में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।

वैशाली ग्रीन बेल्ट पर भी हो रहा है अवैध निर्माण

Nov 19, 12:56 am
गाजियाबाद, वरिष्ठ संवाददाता : दिल्ली से सटी वैशाली में जमीन के दाम आसमान छूने के साथ यहां ग्रीन बेल्ट पर भी बिल्डरों की निगाह पड़ गयी। इसका नतीजा रहा है यहां भूखंडों पर निर्माण होने के साथ ग्रीन बेल्ट पर भी निर्माण होने लगा। अवैध निर्माण ने बिल्डरों के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि उन्होंने भूखंडों पर निर्माण के साथ ग्रीन बेल्ट की जमीन को भी नहीं छोड़ा। जिन बिल्डरों के आस पड़ोस में ग्रीन बेल्ट की जमीन मिली या तो वहां अवैध निर्माण होने लगा या वहां बिल्डर ने पार्किग बना लिया।
आसमान छूती कीमतों ने बढ़ाया जमीन का मूल्य
दिल्ली के लोगों की मकान के प्रति बढ़ी चाहत ने वैशाली में जमीन की कीमत आसमान पर पहुंचा दी। वर्तमान में यहां 70 हजार से एक लाख रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन बिक रही है। बढ़ी कीमतों ने यहां फ्लैटों के दाम बढ़ाए ही साथ में अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में बिल्डरों ने उल्टा सीधा काम शुरू किया। बढ़ी जमीन की कीमतों के कारण बिल्डरों ने आसपास के ग्रीन बेल्ट को घेरना शुरू किया। घेरने के बाद यहां अवैध निर्माण शुरू हो गया।
जीडीए अधिकारियों की मिलीभगत से होता है निर्माण
ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण का काम जीडीए अधिकारियों की मदद से होता है। इसके लिए जीडीए अधिकारियों को पटाया जाता है इसके बाद निर्माण की मौन स्वीकृति अधिकारियों द्वारा मिलती है। बिल्डर तय मानचित्र से हटकर थोड़ी जगह बढ़ाकर अवैध निर्माण करना शुरू करता है। लेकिन उसे रोका नहीं जाता है।
ग्रीन बेल्ट को घेरने के हैं कई तरीके
बिल्डरों ने ग्रीन बेल्ट घेरने के लिए कई तरह की युक्तियां लगा रखी है। इनमें भूखंडों को बढ़ाकर निर्माण किया ही जाता है। कई बार सामने पड़ने वाले भूखंडों का बिल्डर पार्किग के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इससे आम लोगों को काफी परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि इससे हरि पट्ट्टी समाप्त होते जा रही है।
इस संबंध में जीडीए सचिव नरेंद्र कुमार का कहना है कि ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण पर धारा 27 के तहत कार्रवाई की जाती है।

विकास कार्यो से जवाब देगी राज्य सरकार

Nov 19, 12:56 am
नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : दिल्ली सरकार कागजी कॉलोनियों को लेकर हो रहे चौतरफा हमलों का जवाब विकास कार्यो से देगी। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर की 1018 अनधिकृत कॉलोनियों में चल रहे विकास से संबंधित कार्यो में और तेजी लाई जाए। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने शुक्रवार को अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्यो को लेकर एक बैठक बुलाई। इसमें डीएसआइआइडीसी, सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग तथा शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने शिरकत की। बैठक में चौहान ने अधिकारियों से कहा कि वे अनधिकृत कॉलोनियों में सड़क, सीवर, नाली आदि के निर्माण के कामों में तेजी लाएं, ताकि इनमें रहने वालों को सहूलियत मिल सके।
दरअसल कागजी कॉलोनियों का मामला सामने आने के बाद सरकार पर हमले तेज हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि विपक्ष इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में है। नगर निगम चुनाव के मद्देनजर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यही कॉलोनियां आखिरकार चुनावी नतीजे तय करेंगी। ऐसे में दिल्ली सरकार ने विभिन्न अनधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्यो को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाकर विपक्ष के हमले की धार को कुंद करने की कोशिश शुरू कर दी है।
शहरी विकास मंत्री चौहान ने इस मामले में पूछने पर कहा कि दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही विभिन्न अनधिकृत कॉलोनियों को प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किए। उन्होंने कहा कि यह शर्त रखी गई थी कि जो कॉलोनियां केंद्र सरकार द्वारा नियमितीकरण के लिए तय मानकों को पूरा करती हों, उनकी आरडब्लूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) शपथपत्र देकर प्रोविजनल सर्टिफिकेट हासिल कर सकती हैं। ऐसे में अब सरकार को और कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है। चौहान ने कहा कि हमने विभिन्न आरडब्लूए द्वारा दिए गए शपथपत्र के अनुसार उन्हें प्रोविजनल सर्टिफिकेट बांटे। यदि उन्होंने गलत शपथपत्र पेश किए हैं, तो इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ेगा।
दिल्ली सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ हुई बैठक में चौहान ने मुख्यमंत्री के समक्ष यही कहा कि सरकार ने प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करने में कोई भी गलती नहीं की है। सबकुछ केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत किया गया। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा यही किया जा सकता है कि जिन कॉलोनियों के बारे में शिकायत की गई है, उनकी जांच करा ली जाए और उनको दिया गया सर्टिफिकेट रद करते हुए उनकी आरडब्लूए के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। चूंकि यह मामला दिल्ली के लोकायुक्त जस्टिस मनमोहन सरीन के समक्ष भी लंबित है। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित कर लेना चाहती है कि यदि कोई पूछताछ हुई, तो उसका जवाब क्या दिया जाएगा।

Thursday, November 17, 2011


एकल यूनिटों पर बहुमंजिला इमारतों का निर्माण

Nov 17, 08:25 pm

गाजियाबाद, वरिष्ठ संवाददाता
दिल्ली से सटी वैशाली में पचास मीटर से लेकर एक हजार मीटर तक के प्लाट मौजूद हैं। लेकिन इकलौती यही कालोनी है जिसमें शायद ही एकल मकान ढूंढने से मिले। सभी आकार के प्लाटों में तीन से चार मंजिला इमारतें खड़ी हैं। खासकर छोटे प्लाटों पर कई मंजिला इमारतें बनने से सड़कें और सीवर व्यवस्था जवाब दे गयी हैं। यहां पर सड़क पर पार्किग होने के अलावा पेयजल के लिए गंगाजल पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थिति यह है कि जिन दिनों यहां गंगाजल की आपूर्ति बंद होती है, उन दिनों यहां पेयजल के लिए हाहाकार मच जाता है। वर्तमान में यहां गाडि़यां सड़कों पर खड़ी होती हैं। इसके लिए बिल्डर के अलावा जीडीए पूरी तरह से दोषी है।
-लागत और मुनाफे ने बढ़ाया अवैध निर्माण
दो दशक पूर्व जब जीडीए की वैशाली कालोनी विकसित होनी शुरू हुई, उस समय यहां बसने वालों की कम मारामारी थी। लेकिन दस साल पहले यहां एक प्लाटों पर बहुमंजिला भवनों का निर्माण शुरू हुआ। इस दौरान आम लोग अधिक मुनाफे के चक्कर में बिल्डरों को भूखंड बेचकर चले गए। उसी समय से बिल्डरों ने भूखंडों पर तीन से चार मंजिला भवनों का निर्माण शुरू किया। लागत और मुनाफे के चक्कर में बिल्डरों ने तीन चार फ्लैटों का निर्माण शुरू किया।
-मानकों के विपरीत हुआ निर्माण
नियमानुसार एकल यूनिटों पर अधिकतम ढाई मंजिला इमारतों का निर्माण हो सकता है। लेकिन एक भूखंड पर न्यूनतम तीन और चार फ्लैट तक बनाए गए। बिल्डरों की इस कारस्तानी में जीडीए की मदद मिली। जीडीए ने अवैध निर्माण रोकने की कोशिश नहीं की बल्कि परोक्ष रूप से बढ़ावा ही दिया। इसका नतीजा रहा कि आज भी यहां अवैध फ्लैटों का निर्माण हो रहा है।
-घट रहीं सुविधाएं
वैशाली में बढ़ रहे अवैध निर्माण के कारण यहां लगातार बुनियादी सुविधाएं घट रही हैं। एक भूखंड से तीन से चार फ्लैटों के निर्माण के कारण यहां हर तरह की बुनियादी सुविधाएं घट रही हैं। सीवर समस्या यहां आम हो गयी है। पेयजल के लिए यहां के लोगों को गंगाजल पर निर्भर रहना पड़ता है। क्षेत्र में कनेक्शनों की संख्या बढ़ने के कारण बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रहती है। इस संबंध में जीडीए उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि समय समय पर यहां की सड़कों का निर्माण कराया जाता है। अवैध निर्माण रोकने के लिए उचित कार्रवाई की जाती है।


अरबों का एक और भूमि घोटाला

Nov 16, 10:01 pm
नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : फर्जी कॉलोनियों की तपिश से झुलस रही दिल्ली सरकार पर एक और जमीन घोटाले का आरोप लगा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि दिल्ली सरकार और यहा के बड़े भू-माफियाओं ने मिलकर राजधानी में अरबों रुपये का भूमि घोटाला किया है। उन्होंने घोटाले में बड़े लोगों की लिप्तता को देखते हुए इस भूमि घोटाले से संबंधित सभी दस्तावेज तुरंत सील करने की माग दिल्ली के उपराज्यपाल से की है।
विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि डीएनडी फ्लाईओवर के दोनों तरफ खाली पड़ी जमीन को गंगा विहार अनधिकृत कॉलोनी दिखाकर सत्तादल के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अस्थायी प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। यह कॉलोनी 200 एकड़ भूमि पर बसी दिखाई गई है। खाली पड़ी यहां की जमीन दिल्ली सरकार द्वारा प्राप्त अस्थायी प्रमाण पत्र दिखाकर 50 से 70 हजार रुपये वर्गमीटर के बीच बेची जा रही है।
गुप्ता बताते हैं कि कुछ प्रभावशाली बड़े लोग इस बहुमूल्य जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। यह घोटाला राधाकृष्ण विहार, कोटला महीगराम एक्सटेंशन, जसोला, सरिता विहार तथा अबुल फजल एंकलेव पार्ट-2 घोटाले के अतिरिक्त है। गंगा विहार किलोकरी गाव निकट कालिंदी कुंज के इस घोटाले के अतिरिक्त इसी तरह का एक अन्य घोटाला तैमूर नगर एक्सटेंशन में भी किया गया है। यहां भी मामला अरबों रुपये का है।
गंगा विहार कॉलोनी की भूमि का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण कानून की धारा-4 केतहत डीडीए ने 23 जून 1989 को किया था। धारा 6 और 17 के तहत 22 जून 1990 को 27 रुपये वर्गमीटर की दर से मुआवजा देकर इस भूमि का कब्जा भी दिल्ली विकास प्राधिकरण ने ले लिया था। यह मुआवजा किसानों को कम लगा और वे इसके विरुद्ध अतिरिक्त जिला जज की अदालत में गए। एडीजे ने मामले को जनहित में संगीन मानकर स्वयं मौका-मुआयना किया। उन्होंने मौके पर पाया कि पूरी जमीन खाली पड़ी है और उस पर सिर्फ एक मंदिर तथा एक समाधि का निर्माण हुआ है। जमीन खाली थी, इसलिए जून 2011 में अदालत ने इसका मुआवजा 27 रुपये से बढ़ाकर 89 रुपये वर्गमीटर के हिसाब से भुगतान करने का आदेश डीडीए को दे दिया।
डीडीए के रिकार्ड में इस भूमि का एवार्ड संख्या 14, 15, 16, 18 दर्ज है। किलोकरी गाव के किसान 27 रुपये और 89 रुपये के मुआवजे के चक्कर में परेशान हैं और इसी बीच भू-माफिया ने इस बहुमूल्य जमीन को अनधिकृत कॉलोनी बसी दिखाकर इसका अस्थायी प्रमाण पत्र सोनिया गाधी और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हाथों अक्टूबर 2008 में हासिल कर लिया। इस अस्थायी प्रमाणपत्र पर तत्कालीन राजस्व मंत्री राजकुमार चौहान के हस्ताक्षर हैं।
गंगा विहार कॉलोनी का खुद मौका-मुआयना करने के बाद विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि डीएनडी फ्लाईओवर के दोनों तरफ स्थित इस कॉलोनी की भूमि पर कोई भी मकान नहीं बना है। जमीन एकदम खाली पड़ी है। यहा सिर्फ एक मंदिर तथा एक मजार है। उन्होंने बताया कि काग्रेस सरकार द्वारा अस्थायी प्रमाणपत्र बाटने में भी जबरदस्त घोटाला किया गया है।

Wednesday, November 16, 2011


डीडीए अथॉरिटी की बैठक में हंगामा

Nov 15, 10:40 pm
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता:
फर्जी कॉलोनियों को बांटे गए प्रोविजनल सर्टिफिकेट के मामला उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई डीडीए अथॉरिटी की बैठक में जोर-शोर से उठा और इस मुद्दे को लेकर जम कर हंगामा हुआ। सदस्यों ने मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की। उपराज्यपाल ने इसकी जांच के लिए हाईलेवल कमेटी के गठन की बात कही है। उन्होंने इस संबंध में आश्वासन दिया, तब जाकर सदस्य शांत हुए। उपराज्यपाल ने बैठक में कहा कि यह गंभीर मामला है इसकी जांच कराई जाएगी।
डीडीए अथॉरिटी की बैठक शुरू होते ही भाजपा विधायक व डीडीए के सदस्य डॉ. हर्षवर्धन ने अवैध कॉलोनियों का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पहले इस बात पर चर्चा की जाए कि दिल्ली सरकार ने 2008 में ऐसी कॉलोनियों को किस आधार पर प्रोविजनल सर्टिफिकेट बांट दिए जो कॉलोनियां हैं ही नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच भी एक ऐसे मंत्री को सौंप दी है, जिसके दस्तखत से ही इन कॉलोनियों को प्रोविजनल सार्टिफिकेट बांटे गए थे। डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि मामले को लोकायुक्त में भेजा गया है। जिस पर इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री को नोटिस भी मिला है।
डीडीए सदस्य राजेश गहलौत ने कहा कि राधा कृष्ण विहार, कोटला महीगराम एक्सटेंशन, अबुल फजल एनक्लेव पार्ट-टू जीएच ब्लॉक, शक्ति एनक्लेव ऐसी चार कॉलोनियां के नाम हैं जिनका अस्तित्व सिर्फ कागजों में है। जबकि दिल्ली सरकार 2008 में इन्हें प्रोविजनल सर्टिफिकेट दे चुकी है। वहीं कांग्रेस के सुभाष चोपड़ा ने मांग की कि यह करोड़ों का घपला है। मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग इसमें शामिल रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो।

दिल्ली में नए सर्किल रेट लागू

Nov 16, 08:46 pm
नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : दिल्ली में संपत्ति खरीदना बुधवार से महंगा हो गया। अब आपको मकान-दुकान आदि की रजिस्ट्री कराने के लिए ज्यादा रकम चुकानी होगी। दिल्ली सरकार ने कुछ दिनों पूर्व मंत्रिमंडल द्वारा तय किए गए नए सर्किल रेट की अधिसूचना जारी कर दी है। खास बात यह है कि इस मद में अधिकतम 250 फीसदी तक की वृद्धि कर चुकी सरकार अगले साल फिर से सर्किल रेट बढ़ाने का इरादा रखती है।
उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई और नए सर्किल रेट बुधवार से लागू हो गए। पिछले दिनों दिल्ली मंत्रिमंडल ने शहर की ए से लेकर एच तक की अलग-अलग श्रेणियों में आने वाली कॉलोनियों के सर्किल रेट में 15 से 250 प्रतिशत तक की वृद्धि करने का फैसला लिया था। इस बढ़ोतरी के अमल में आ जाने से सरकार की कमाई में प्रतिवर्ष 800 करोड़ रुपये के इजाफे का अनुमान है।
दिल्ली सरकार ने ए श्रेणी में आनेवाली राजधानी की अत्यंत पॉश कॉलोनियों के सर्किल रेट में 250 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसके अलावा बी, सी तथा डी श्रेणी में आने वाली कॉलोनियों के सर्किल रेट में 100 फीसदी, ई श्रेणी में 20 फीसदी तथा एच श्रेणी की कॉलोनियों के सर्किल रेट में 15 फीसदी की वृद्धि की गई है।
दिल्ली सरकार ने इस दलील के साथ सर्किल रेट को बढ़ाया है कि शहर में संपत्तियों की खरीद फरोख्त में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल किया जाता है। संपत्तियां बेची ज्यादा कीमतों पर बेची जाती हैं, लेकिन रजिस्ट्री कराते समय उन्हें कम कीमत का दिखाया जाता है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_8498687.html

Friday, November 11, 2011

वैशाली  इन्द्रपुरम ---  कौशाम्बी के बाद आता है, वैशाली वैशुधरा इन्द्रपुरम ,इन्द्रपुरम नॉएडा  को NH -२४ दिवयिद  कराती है ,नॉएडा एक ओउधोगिक क्षेत्र होने की वजह से वैशाली इन्द्रपुरम में प्रोपर्टी की सेल वलुव लगातार बढ़ती जा रही है ,इन्द्रपुरम में तोतली न्यू डेवेलपमेंट हुआ है,यहं पर १००%  आवासीय सोसाईटी कोठी प्लाट  आदि हैं ,

Sunday, November 6, 2011

Real Easte in Gaziabad in up

कौशाम्बी --यह डेल्ही और उत्तर्प्रदेस की सीमा निर्धारित  करता है . यहाँ पर आनंद विहार रेलवे स्टेशन ,अंतररास्ट्रीय  बस स्टैंड ,मेट्रो स्टेशन एवं  कई एक माल्स हैं .यहाँ पर प्रोपर्टी की अच्छी खासी कीमत है.
वैशाली --